अर्थराइटिस- ARTHRITIS IN HINDI

अर्थराइटिस(गठिया रोग)- ARTHRITIS IN HINDI

अर्थराइटिस यानी गठिया आजकल की जीवनशैली, मोटापा, गलत खानपीन आदि वजहों से यह रोग अब केवल बुजुर्गो तक हीं सीमित नहीं रह गया है, बल्कि युवा भी इसका शिकार होते जा रहे है। अर्थराइटिस का सबसे बड़ा प्रभाव घुटनों में और उसके बाद कुल्हे की हड्डियों में दिखाई देता है। बहुत से लोग समय-समय पर अपने बदन में दर्द और अकड़न महसूस करते रहते हैं। कभी-कभी उनके हाथों, कंधों और घुटनों में भी सूजन और दर्द रहता है और उन्हें हाथ हिलाने में भी तकलीफ होती है। ऐसे संकेत दिखने वाले लोगों में अर्थराइटिस हो सकता है।

अर्थराइटिस क्या होता है: What Is Arthritis?

अर्थराइटिस यानि जोड़ों की सूजन। यह एक संयुक्त या एकाधिक जोड़ों को प्रभावित करता है। लगभग 100 से अधिक विभिन्न प्रकार के गठिया हैं जिनके उपचार और कारण है। सबसे मुख्य दो हैं ऑस्टियो अर्थराइटिस और रूमेटोइड अर्थराइटिस। अर्थराइटिस जोड़ों के ऊतकों की जलन और क्षति के कारण होता है। जलन के कारण ही ऊतक में दर्द और सूजन आ जाती हैं। अर्थराइटिस आमतौर पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में होता है, लेकिन यह बच्चों और युवाओ में भी विकसित हो सकता है।

अर्थराइटिस के प्रकार: Types Of Arthritis

रूमेटॉयड अर्थराइटिस:

यह अर्थराइटिस बीमारी का गंभीर रूप है जो सबसे अधिक पाया जाता है। इस अर्थराइटिस का समय पर संभव इलाज कराना बहुत आवश्यक होता है नहीं तो एक साल के अंदर ही इससे हड्डियों को नुक्सान पहुंचता है।

ओस्टियोसोराइसिस:

इस तरह का अर्थराइटिस आनुवांशिक हो सकता है। यह उम्र बढ़ने के साथ दिखाई देता है। मुख्य रूप से यह शरीर का भार सहन करने वाले अंगों कमर, पीठ, घुटना और पैर को प्रभावित करता है।

सोराइटिक अर्थराइटिस:

सोराइसिस, अर्थराइटिस के दर्द का एक घातक रूप होता है। सही समय पर और सही इलाज न होने के कारण यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज हो जाती है।

पोलिमायलगिया रूमेटिका:

यह रोग 50 साल की उम्र पार कर चुके लोगों को होता है। इसमें गर्दन, कंधा और कमर में असहनीय दर्द  होता है और इन अंगों को घुमाने में मुश्किल होती है। सही समय पर सही इलाज हो जाये तो इस बीमारी से बचा जा सकता है। लेकिन आमतौर पर कुछ कारणों से इसका इलाज संभव नहीं हो पाता।

रिएक्टिव अर्थराइटिस:

रिएक्टिव अर्थराइटिस होने का खतरा शरीर में किसी तरह के संक्रमण फैलने से रहता है। आंत या जेनिटोरिनैरी संक्रमण होने के बाद इसके होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

अर्थराइटिस के लक्षण: Symptoms of arthritis

  • जोड़ों में दर्द रहना।
  • जोड़ों में सूजन का आ जाना।
  • जोड़ों को घुमाने में परेशानी होना।
  • जोड़ों को घुमाने–फिराने में देर लगना।
  • जोड़ों में भारीपन आ जाना।

 

अर्थराइटिस की बीमारी जितनी पुरानी होती जाएगी ये उतनी ही अधिक तकलीफदेह होती जाती है। इसलिए, इसके लक्षण पता चलते ही तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। इस प्रकार की समस्या में दवाओं के साथ साथ व्यायाम और योग से भी काफी लाभ मिलता है।

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